डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की सफलता का कारण || biography ऑफ़ एपीजे अब्दुल कलाम

नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने वाले है बिखरी जुल्फों वाले  हम सबके देश के महान व्यक्ति डॉ APJ ABDUL KALAM की तो दोस्तों सवाल उठता है उनके नाम से उनके नाम की full form क्या है , या  फिर उनके नाम का मतलब क्या है —

डॉ APJ ABDUL KALAM की full form क्या है |

( What Is The Full Form Of Dr. APJ ABDUL KALAM )

 

A – Avul- Greater GrandFather
P – Pakir-GrandFather
J – Jainulabdeen-Father 

 
बचा हुआ अब्दुल कलाम वो उनका खुद का नाम था , ये हमारे देश के 11 वे ( ग्यारह वे ) राष्ट्रपति थे ,एक बार की बात है  कक्षा में बैठे विध्यार्तियों से टीचर ने पूछा की – डॉ एपीजे अब्दुल कलाम कोन है एक लाइन में परिभाषित कीजिये ? उन बच्चों में से एक बच्चा खड़ा हुआ और बोला – वह एक साधारण भारतीय नागरिक है , जिनको कभी एक लाइन तो क्या एक पूरी कॉपी में भीं परिभाषित नही किया जा सकता फिर चाहे आप दुनिया के सारे विशेषड क्यों न  लगा दे लेकिन उनको कभी भी परिभाषित नही किया जा सकता || 

एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म कब और कहा हुआ ?

सफल केसे हो ? सफल होने का मंत्र ?

जब एक बार हमारे माननीय राष्ट्रपति बच्चों के स्कूल व collage में गए तो बच्चो ने उनसे पूछा की सफल होने का तरीका क्या है ? या फिर आप हमको सफल होने का मंत्र क्या है इसके बारे में बताये ? तो डॉ APJ अब्दुल kalam ने बताया की अगर आपको जिन्दगी में सफल होना है तो आपको सिर्फ 4 steps को follow करना होगा यानि सिर्फ  4 बातो को मरते दम तक याद रखना होगा — 


1.Great Aim
 

आपको बड़े से बड़ा जो आपको अच्छा लगे  या फिर जो कुछ भी आपके माता – पिता का सपना हो उसे आपको अपना टारगेट ( Target ) बनाना है , जेसे की डॉक्टर , वकील लॉयर ,वैज्ञानिक  ,आदि | इनको या फिर इनके अलावा आपको अपना एक Aim बनाना है || 


2.Acquire Knowledge  

जेसा की आपने ऊपर वाले टॉपिक ( Great Aim )में दिया गया है की आपको बड़े से बड़ा अपना Aim यानि कोई अपना सपना जो की आप बनना चाहते है , आपको उसे सोचने और समझ ने के बाद उसके बारे में आपको जितना ज्यादास हो सके उतना आपको उसके बारे में नॉलेज ( knowledge ) यानि जानकारी को कलेक्ट करना है और उससे एक कॉपी में लिखने के बाद उस पेज को अपने सामने दीवाल पर चिपका दो जिससे जब आपकी नज़र उस कागज़ पर जब जाएगी तब आप अपने Aim के प्रती जाग्रुत होते रहेंगे |
 
 
 

3.Hard Work 

दोस्तों जेसा की 3rd step में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा है की hard Work आप इस से ही समझ गये होंगे अब्दुल कलाम जी ने कभी भी hard work को नही छोड़ा उनका कहना था की यदि आप कभी कठिन परिश्रम का हाथ नही छोड़ेंगे तो आपका हाथ कभी सफलता नही छोड़ेगी तो इसी तरह से आपको कभी भी कठिन परिश्रम  का हाथ नही छोड़ना है, जिससे सफलता आपका कभी हाथ न छोड़े ||
 
 

4.Persevrance  

Perservance का मतलब है आपको कभी हार नही मान है , जेसा की आपको पता है की जब अब्दुल कलाम जी छोटे थे तो उन्होंने स्कूल का प्रोजेक्ट नही बनाया था जिसको बनाने के लिए आराम से 2 महीने दिए थे , जिसकों कम से कम 15 दिन में ख़तम किया जा सकता था लेकिन कलाम जी ने इसे नही किया तो इनके स्कूल टीचर बोले की अगर आपने मुझे प्रोजेक्ट पूरा करके नही दिया तो मई आपकी स्कॉलरशिप कैंसिल कर दी जाएगी तो इसे सुन के अब्दुल कलाम जी ने तिन दिनों में बिना नीद लिए एक सबसे अच्छा प्रोजेक्ट बना कर ready कर दिया जिसको ready करना नामुनकिन था लेकिन अब्दुल कलाम जी ने कभी हार नही मानी |
 
 
 
 

एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म कब और कहा हुआ ?

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 -oct-1931 में  रामेशवरम में हुआ था जो की तमिल नाडू में है ,उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ , गरीबी के कार्ड उनके पिता  नाविक थे | उनके पिता जो की शुरू से ज्यादा पढ़े लिखे नही थे , तो उनको काफी तकलीफे आई ,एक बार क्लास के अन्दर उनका एक दोस्त हुआ करता था जो की मुख्या पुरोहित जी का बेटा  था , तो ये कलाम जी के साथ आगे पहली ब्रेंच पर बैठा था , तो मास्टर जी नाराज़ हो गये और जोर से गुस्सा में बोले ये मुसलमानी लड़का पहली ब्रेंच पर मुख्य शाश्त्री जी के लड़के के संग केसे  बैठा है , और कलाम के पास गये और एक दिया कान के निचे और कलाम को पिच्छे बैठा  दिया || उस ही दिन से कलाम जी ने वही उस ही जगह पर संकल्प लिया की पिच्छे बैठ  कर दुनिया बदलूँगा , और डॉ एपीजे अब्दुल कलाम  अक्शर कहा करते थे की दुनिया का सबसे अच्छा दिमाग पीछे वाली ब्रेंच पर चलता है || अब्दुल कलाम जी का परिवार बहुत बड़ा था उनके 10 भाई  बहन थे उन्होंने अपना कर्चा निकालने के लिए अखबार बेचना सुरु कर दिया वह अखबार इसलिए बेचते थे क्योकि उन्हें पता था की अखबार बैच कर पैसा तो आयेगा लेकिन उसे बेचते बेचते रास्ते में पूरा अख़बार पद लिया करूँगा || जब अब्दुल कलाम जी छोटे थे यानि लघभग 8 साल के थे तो इनके गाव से 1 किलोमीटर दूर एक मास्टर जी बहुत अच्छा  गडित पड़ाया करते थे , उन्होंने एक दिन सभी बच्चों से कहा  की सुबह 4 बजे जो बच्चा नहाधोकर आयेगा उसके लिए  एक घंटे की क्लास फ्री है  अब कलाम जी अपने घर से कई किलोमीटर दूर सुबह 3 बजे उठकर  नहाधोकर ठन्डे पानी से किसी भी मोसम में सर्दी हो चाहे बारिश या तूफ़ान हो 4 बजे पहुँच जाया करते थे और कलाम जब अपने घर पे रात को पड़ते थे तो उनके वहा पर लालटेन होती थी मिटटी के तेल से जलने वाली 7 से लाकर 9 बजे तक केवल दो घंटे का तेल था इनके पास लेकिन इनके पिताजी ने और माता जी ने देखा की लड़का का पढने में इंटरेस्ट है तो वो खुद अँधेरे में सोकर अपने कमरा का लालटेन भी कलाम जी को दे दिया  करते थे ||  कलाम जी मेहनत से कभी डरे नही और ईमानदारी से कभी हेट नही ||
 
 
 

 

 

लक्ष्य कैसा देखना चाहिए ??

कलाम जी का कहना था की छोटा लक्ष्य देखना पाप के सामान है इसी लिए हमेशा महँ लक्ष्य चुनना होगा जब वे 5 वी क्लास में थे तो उनके टीचर उन्हें मैदान में ये समझाने ले गये की चिड़िया उडती केसे है वह पर उसकी डिटेल की डिटेल बता रहे थे तो वही से इनका लक्ष्य तय हो गया  इनका घर भी समुद्र किनारे था वही से इन्होने ठान लिया की मुझे एक अच्छा एरोनॉटिक्स बनना है — 
कलाम की अक्शर कहा करते थे –
               
                            यदि आप सूर्य की तरह चमकना चाहते है तो उससे पहले 
                                     आपको सूर्य की तरह जलना पड़ेगा || 
 
अब्दुल कलम जी की बचपन से ही अश्मन में उड़ने की इच्छा थी इसलिए उन्होंने मद्रास का सबसे अच्छा collage में अपना दाखिला करवा लिया जिसको आज भी लोग मद्रास insitute of Technology के नाम से भी  जाना जाता है इनकी  बहिन ने अपना सोना गिरवी रख कर इन्हें पड़ने के लिए एक हज़ार रूपए दिए अब इन्होने ऐरोनोतिक्स के डिपार्टमेंट में दाखिला करवाया था था तो इन्हें प्रोजेक्ट मिला विमान बनाने का इन्होने डिजाईन जो बनाया और टीचर को दिखाया और टीचर को वो पसंद नही  आया और टीचर ने कहा की अब्दुल कलाम की तुम एक अच्छा डिजाईन नही बना सके तो तुम्हारी स्च्कोलार्शिप नही मिलेगी , जेसे ही इन्होने ये बात सुनी इनका दिमाग चकराने लगा और इनको लगा की अगर मेने 3 दिन के अन्दर प्रोजेक्ट नही कम्पलीट किया तो मेरी स्च्कोलार्शिप चीन ली जाएगी इस्सं वजह से अप्जं अब्दुल कलाम जी ने 3 दिन तक लगातार बिना नीद लिए एक ऐसा प्रोजेक्ट बना कर दिखाया जिस से टीचर भी खुश हो गये और उनके आंख से आसूं  आ गये फिर उन्होंने इस ख़ुशी के बाद MIT की परीक्षा अच्छे अंकों से उन्होंने पास करी , उसके ठीक बाद अब्दुल कलाम जी को  DRDO में नौकरी मिल गयी ये वहा  डॉ  विक्रम सरबाही के साथ उनकी टीम में प्रोमोट कर दिए गये , और कुछ समय बाद डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की बहादुरी को देख इन्हें  NASA  भेज दिया गया , और इसके बाद नासा इन्हें देख के चौख गया और बोला यार लड़का तो बहुत जबरदस्त है , और वहा पर डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को अमेरिकन सिटीजनशिप के साथ – साथ भारत से पांच गुना ज्यादा तनखाह  देने का प्रस्ताव रखा गया  , लेकिन डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने  बिना सोचे समझे हुए मना कर दिया और मन ही मन सोचा देश सेवा के अवसर को इसे नही गवाएंगे , फिर वहा से लौट के वापस   भारत आ गये | 
 
 
 
 
 
तो दोस्तों आज की इस पोस्ट में हमने  डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जीवन कहानी के बारे में पढ़ा  इसमें हमने उनके दुबरा  दी  गयी बातो को पढ़ा फ्रेंड्स आशा करते है आज की पोस्ट आपको बहुत अच्छी लगी होगी | अगर आप अपना कोई भी विकल्प करना चाहते है तो निचे दिए गये कमेंट बॉक्स में प बता सकते है ||

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